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भारतीय अपनी संस्कृति से जुड़ राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आए
(Yogesh Gautam) Dainikkhabre.com Thursday,16 August , 2018)

New Delhi News ,16 Aug 2018 : स्वतंत्रता दिवस सभी भारतीय नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिवस उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का अवसर है जिन्होंने हमें एक सुंदर और शांतिपूर्ण जीवन देने के लिए अपने प्राणों को भी न्योछावर कर दिया। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिल्ली स्थित दिव्य धाम आश्रममें 15 अगस्त2018 को 72वें स्वतंत्रता दिवस पर स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए आध्यात्मिक स्वराज रूप में इस महत्वपूर्ण दिन को मनाया गया।श्री आशुतोष महाराज जी के प्रचारक शिष्यों ने श्रोताओं को आजादी का वास्तविक अर्थ समझाते हुए बताया कि वास्तविक स्वतंत्रता सभी बंधनों से मुक्त हो प्रभु की भक्ति करना है। जीवन और मृत्यु के चक्र में हम अपने कर्मों के गुलाम बन चुके है। आज के समय में इंसान के विचार दूषित होते जा रहे है!
मानव इस सृष्टि का सबसे श्रेष्ठतम प्राणी है! इसलिए उससे यह अपेक्षा भी की जाती है कि वह तदनुरूप श्रेष्ठतम कार्य व्यवहार करे! अपने जीवन को सब प्रकार से स्वस्थ बना उसे सम्पूर्णता प्रदान करे! कठोपनिषद के अनुसार मनुष्य का जीवन मात्र उसके शरीर से संचालित नहीं है! यह शरीर तो एक रथ के समान है! इसमें आत्मा रुपी रथी विद्यमान है, जिसका सारथी बुद्धि एवं मन लगाम है! अत: स्वस्थ जीवन केवल शरीर पर कैसे निर्भर हो सकता है? सम्पूर्ण स्वास्थ्य तो तन, मन और आत्मा – तीनों के समग्र विकास पर आधारित है! 
आज मानव जीवन अपूर्ण विकास के कारण ही अनेकों व्याधियों का ग्रास बन बैठा है! वह मात्र छिलके जैसे देहावरण को तो सजाने में जुटा हुआ है परन्तु बीज तत्व-आत्मा को सवर्था भुला बैठा है! जबकि सत्यस्वरूप महापुरुषों ने हमें सदा इस आत्मा पर केन्द्रित हो, इसे विकसित, इसे जागृत करने का आदेश दिया! उपनिषदों ने कहा – आत्मानम विद्धि – अपने आत्म-तत्व को जानो! प्रभु श्री राम ने भी अपने भक्त हनुमान को यही प्रेरणा दी – हे हनुमान, अपने अंदर ही ज्योतिस्वरूप प्रकाश की खोज करो! अत: ब्रह्मज्ञान द्वारा दिव्य दृष्टि को प्राप्त कर अपने भीतर ज्योतिस्वरूप परमात्मा का साक्षात्कार कर लेना ही जीवन का मूल लक्ष्य है! इस पथ के अनुगामी की ही आत्मा पूर्णरूपेण जागृत होती है! ऐसा ही जागृत रथी, बुद्धि रुपी सारथी को सही दिशा-निर्देश दे पाने में सक्षम है! और ऐसी ही नियंत्रित बुद्धि मन रुपी लगाम को कस कर इन्द्रियों रुपी घोड़ों को भटकने से बचा सकती है! इस प्रकार की समन्वित चाल से ही जीवन पूर्ण रूपेण स्वस्थ हो अपनी मंजिल को प्राप्त करता है!भारतीय शास्त्रों के अनुसार पूर्ण गुरु मानव को सही दिशा प्रदान करते हैं। वे अपने मार्गदर्शन से साधक को सांसारिक और आध्यात्मिक जीवन में हर पल आनंद का अनुभव करवाते हुए आध्यात्मिक स्वतंत्रता की ओर अग्रसर करते है।

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